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Sunday, 3 June 2018

Vishnu Bhagwan ke das avtars

Vishnu Bhagwan ke das avtars





हेल्लो दोस्तों,
इस पृथ्वी पे कई देवी देवतायो ने अनगिनत बार यहाँ जनम लेकर पाप का नाश किया है त्रिदेवो में से एक भगवान विष्णु जी है जिन्हों ने समय समय पे अलग अलग रूपों में अवतार लेकर दानवो का संग्हार किया भगवान विष्णु को पालनहार कहा गया है
आप सब ने रामायण तथा महाभारत की कथाएं तो सुनी ही होंगी ,वे हर युग मे इस पृथ्वी पे अवतार के रूप में आते रहे हैं और आते रहेंगे ताकि बुराई का अंत हो सके और धर्म का राज स्थापित हो सके ,हर तरफ सुख समृधि हो तथा मनुष्य जीवन मरण के चक्र से बाहर निकलकर उस परमात्मा में लीन हो सके ,भगवान कृष्ण ने भगवत गीता में यह कथन अर्जुन को स्पष्ट किये है बुराई को मिटाने और धर्म का राज पुनः स्थापित करने के लिए मैं युगों युगों तक अवतार लेकर इस पृथ्वी पर आता रहूंगा
भगवान विष्णु जी ने हर युग में अवतार लिया है वेदों के अनुसार मुख्य रूप से चार युग होते है जो इस प्रकार है सबसे पहले सत्ययुग फिर त्रेतायुग और उसके बाद द्वापरयुग और अब कलयुग है
भगवान् विष्णु जी ने जो अवतार लिए है वो इस प्रकार है

1. मत्स्य अवतार =भगवान विष्णु का जी अवतार सत्ययुग काल में हुआ था ,जिसमे वे एक मछली के रूप में थे और उस समय उन्होंने मनु और सप्तर्षियों को प्रलय से बचाया था और उनको एक नई दुनिया में ले जाकर फिर से बसाया भी था


2. कुरमा अवतार = यह अवतार जब हुआ उस समय भी सतयुग था जब देवों और दानवों ने अमृत पाने की चाह में समुंद्र मंथन कराने के बारे में सोचा तब उन्हें यह समझ नहीं आ रहा था कि वह मंदरा पर्वत को किस नीव् आधार पर रखें तब कुर्मा अवतार ही नीव् आधार बने और पर्वत का भार संभाला जिसकी वजह से कई बहुमूल्य रतन समुद्र से बहार ए और उसके साथ साथ अप्सराये , कामधेनु गाय ,पारीजात वृक्ष ,कई तरह की शक्तिया, विष ,कई दुर्लब बस्तुए और अंत में अमृत भी बहार आया था


3. वाराह अवतार = यह अवतार भी सत्ययुग में ही हुआ था जब हिरान्यक्षा ने पृथ्वी को पानी में डुबो दिया तब भगवन विष्णु जी भगवन ब्रह्मा जी के नाभि से निकले और पृथ्वी को वाराह बनके पानी से उठा लाए


4. नरसिम्हा अवतार = जेबी सत्य की ही बात है जब हिरण हिरण कश्यप ने के बड़े भाई हिरण्यकश्यपु को वरदान मिला कि कोई जानवर नर उसे नहीं मार सकता तब नरसिम्हा अवतार जो विष्णु जी के थे उनका सहार किया अपनी जगह पर रखें और नाखूनों से


5. वामन अवतार =हिरण्यकशिपु के बेटे प्रह्लाद के पोते बली थे जिनको नवेली भी कहते हैं बलि ने तीनों लोकों पर अधिपत्य जताने के लिए जग की है तब विष्णु जी बामण का अवतार धारण किया और जब जगदीश खत्म हुआ तब महाबली ने 52 से कुछ मांगने को कहा वह मैंने सिर्फ तीन पग जमीन मांगी परंतु बाली ने अहंकार में कहा बस तीन पेग कुछ और मांगो पर बाहमण जी ने कहा तीन पग काफी हैं किंतु ऐसा कहते हैं उन्हें विराट रूप धारण किया और एक पग में पृथ्वी तथा दूसरे पक्ष में पाताल देवलोक प्राप्त कर लिया अभी भी एक पक्ष एक था फिर राजा बलि ने अपना शीश आगे कर दिया कहते हैं राजा बलि साल में एक बार केरला की धरती पर प्रजा से मिलने आते हैं और मैं उसी दिन पूनम फेस्टिवल मनाया जाता है

वह जमदग्नि और रेणुका के पुत्र थे और अपनी कठोर तपस्या से भगवान शिव से कुल्हाड़ी पाई थी जब जब कर्तव्य और जूना और उनकी सैनिक टुकड़ी जमदग्नि के आश्रम में आए तब उन्होंने राजा कार्तवीर्य सेना की खातिरदारी दिव्य गाय कामधेनु की सहायता से की राजा ने कहा कामधेनु उसे दे दो परंतु ऋषि नहीं माने तब राजा बलपूर्वक गाय को अपने महल देंगे और आश्रम की तबाही भी कर दी उसके बाद परशुराम जी ने राजा को मार दिया और फिर राजा के पुत्र ने जग जगनी को मार डाला था परशुराम जी ने प्रण लिया कि अब सभी क्षत्रियों को मार देंगे और अंत परशुराम जी ने दादाजी ऋषि रुचिका प्रकट हुए उनकी रोका कहते हैं कि वह चिरंजीवी हैं और महेंद्र गिरी पर्वत पर रहते हैं Parshuram

6. राम अवतार = श्री राम जी की कथा से तो आप सब को अवगत ही होंगे श्री राम जी अयोध्या के राजा दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र थे जब उन्हें 14 साल के लिए वनवास पर जाना पड़ा तब उनके साथ एक घटना घटी लंका का राक्षसराज रावण ने माता सीता का हरण किया लंका ले गया फिर कैसे श्री राम जी लक्ष्मण भगवान हनुमान जी के और सुग्रीव की सेना के साथ मिलकर रावण को का वध किया उनको मर्यादा पुरुषोत्तम भी कहते हैं


7. भगवान् कृष्ण= ये भगवान विष्णु के आठवें अवतार माने जाते हैं इनका जन्म मथुरा में हुआ इनके बड़े भाई का नाम बलराम तथा बहन सुभद्रा तथा इनकी माता देवकी तथा पिता वासुदेव जी थे भगवान कृष्ण की लालन पालने बाले पिता नंद बाबा और माताजी यशोोदा थी। कृष्ण जी ने अपने अनुज और परम मित्र अर्जुन की कुरुक्षेत्र की रणभूमि पर महाभारत के युद्ध में विराट रूप में भगवत गीता का संपूर्ण पाठ सुनाया था और जसको लोग आज भी सम्पूर्ण निष्ठा और विश्वास केेे साथ पढ़ते हैं तथा इसकी पूजा भी करते हैं।


9.भगवान गौतम बुद्ध=भगवान गौतम बुद्ध का जन्म लुंबिनी स्थान जो कपिलबस्तु के पास (इस समय नेपाल में है) वैशाख पूर्णिमा के दिन हुआ था उनका नाम सिद्धार्थ था उनके पिता का नाम शुद्धोधन था यह कौशल असम राज्य के सम्राट थे और माता का नाम महामाया था जिनका बुद्ध के जन्म के साथ देहांत हो गया था तथा उनकी बहन प्रजाप गौतमी ने उनका लालन-पालन किया था उनका विवाह 16 वर्ष की आयु में हुआ जिससे उनको एक बेटा हुआ जिनका नाम राहुल था 12 वर्ष बाद 29 वर्ष की आयु में उन्होंने राजपाट जाकर सानिया सपना बन में काफी दिनों तक घूमने के बाद उन्हें गुरु के रुप में पहला अलार्म लामा और फिर उधर का रमा पता मिले उनके उनके वह भी वह कई वर्षों तक वन में घूमे और कठोर तपस्या कि अंत निरंजना नदी के किनारे बिहार में गया मैं एक पीपल के पेड़ के नीचे उन्हें परम ज्ञान की प्राप्ति हुई और वह बुद्ध बन गए इनकी मृत्यु सन 483 bc में कुशीनगर ,उत्तर प्रदेश में हुई 

इनका जन्म 563 bc हुआ






10. कल्कि अवतार =विष्णु भगवान का यह अवतार इस कलयुग में अवतरित होगा जब पाप बहुत अधिक बढ़ जाएगा तब इनका जन्म एक परिवार में होगा इनके पिता जी का नाम विष्णुयश होगा तथा माता का नाम सुमति होगा । कल्कि जी सफेद घोड़े पे सवार होंगे और उनके हाथों में दो तलवारें होंगे और वह दोनों तलवारों से पापियों का नाश करते जाएंगे यह कल्कि अवतार विष्णु भगवान का दसवां और अंतिम अवतार है।


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